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जन अभियान परिषद्, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, म.प्र. शासन
  • किसी भी गांव/नगर का विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक विकास पुरूष स्थानीय न हों। प्रत्येक ग्राम/नगर में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो स्वावलंबन की दिशा में कार्य करते हैं। समाज की इसी स्वैच्छिक प्रवृत्ति को प्रोत्साहन देने हेतु प्रति वर्ष प्रत्येक विकासखण्ड में 10 नये गांवों/नगरीय क्षेत्रों का चयन किया जायेगा। ''गांव/नगर में चिन्हित व चयनित सक्रिय समूह को 3 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष रू. 10 हजार (एक मुश्त) दिए जाने का प्रावधान हैं। आगामी वर्षों में प्रदेश के समस्त ग्रामों/नगरों में स्वैच्छिकता का भाव विकसित होकर सक्रिय समूह स्वयंसेवी संगठनों/संस्थाओं के रूप में परिवर्तित हो सकेंगे।''
  • राज्य में नवीन स्वयंसेवी संस्थाओं का उन्मुखीकरण एवं पोषण करना परिषद् की एक प्रमुख गतिविधि है। इसके लिए प्रति वर्ष प्रत्येक विकासखण्ड में एक, जिला मुख्यालय पर एक, संभाग मुख्यालयों पर तीन, तीन बड़े शहरों - इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में पांच तथा राज्य की राजधानी भोपाल में दस नवांकुर संस्थाओं का चयन कर उनकी रूचि, क्षमता और जरूरतों के अनुसार प्रथम वर्ष में रू. 0.50 लाख, द्वितीय वर्ष में राशि रू. 1.00 लाख और तृतीय वर्ष में राशि रू. 2.00 लाख का वित्तीय पोषण किये जाने का प्रावधान है।
          यह पोषण जन अभियान परिषद् द्वारा सीधे अथवा किसी अन्य स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से किया जाता है। ''इस सहायता का उपयोग म.प्र. जन अभियान परिषद् द्वारा गठित स्वयंसेवी संगठनों के क्षमतावर्द्धन, सशक्तिकरण तथा ''आओ बनाए अपना म.प्र.'' अभियान अंतर्गत चिन्हांकित नौ विषयों यथा सबके लिए शिक्षा, सबके लिए स्वास्थ्य, नशामुक्ति, हरियाली/पर्यावरण संरक्षण, जलसंरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, कृषि को लाभकारी बनाना, कुपोषण एवं परिवार नियोजन आदि के क्रियान्वयन पर उनकी सक्रीय भागीदारी हेतु उपयोग किया जावेगा।''
  • राज्य की समस्त पंजीबद्ध संस्थाओं का पंजीयन कर उनका परीक्षण व मूल्यांकन किया जायेगा। ''इन संस्थाओं की ताकत, कमजोरियों व अवसरों का मूल्यांकन'' उनके कार्यालय, मैदानी कार्य व वार्षिक रिपोर्ट साथ ही अन्य प्रकाशित दस्तावेजों के आधार पर किया जायेगा। ''इसके आधार पर संस्थाओं का प्रत्याययन (Accreditation) किया जाएगा। यह प्रत्याययन शासन के विभिन्न शासकीय विभागों को उनके कार्यक्रमों एवं योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं क्रियान्वयन में भागीदारी हेतु प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाएँ उपलब्ध कराने का आधार बनेगा।''

  • ग्रामीण अंचलों में लोगों के पास पारंपरिक ज्ञान और कौशल का अथाह भण्डार है। क्षमता और सृजनात्मकता के धनी इन लोगों को जहां एक ओर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर इसका लाभ आम जनता तक व्यापक रूप से नहीं पहुंच पाता है। प्रत्येक जिले में ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित कर आवश्यकता अनुसार ''सहयोग'' देकर उनके सृजनात्मक कार्यों को व्यवसायिक स्तर पर स्थापित किया जाना प्रावधानित है।
           ''पारंपरिक ज्ञान एवं कौशल के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों से संबंधित प्रतिभाओं जैसे -कला, साहित्य, सांस्कृतिक, विज्ञान एवं खेलकूद आदि क्षेत्रों से चिन्हांकन कर उन्हें प्रोत्साहित करने हेतु मेला / प्रदर्षनी /प्रतिस्पर्धायं आदि आयोजित करना तथा प्रशिक्षण व उन्मुखीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमतावर्धन कर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किया जाना प्रस्तावित है।''

समाज के समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु शासन सदैव तत्पर रहा है। संगठनात्मक सीमाओं के भीतर यह सराहनीय प्रयास भी अपने अंतिम उद्देश्य की प्राप्ति में अपर्याप्त रहे है । इस दिशा में अपने व्यवस्थागत ढॉचे का अतिक्रमण कर शासन ने स्वैच्छिक संगठनों के अस्तित्व को मान्यता दी है। जनता और सरकार के बीच सेतु के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों को विकास की सशक्त इकाई के रूप में विकसित करने के उद्देश्य हेतु ’’मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्‘‘ का गठन किया गया है। यह परिषद् शासन को सलाह देने,सामुदायिक भागीदारी प्रोत्साहित करने,स्वयंसेवी संस्थाओं से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी समेकित कर,नीतियों के क्रियान्वयन के लिये एक समन्वयक अभिकरण के रूप में कार्य करेगी। म. प्र. जन अभियान परिषद्,मध्यप्रदेश सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम,1973 के अंतर्गत दिनांक 04.07.1997 को पंजीकृत की गयी है। संस्था का पंजीयन क्रमांक 4964/97है।

श्री उमेश शर्मा,
कार्यपालक निदेशक

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