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जन अभियान परिषद्, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग, म.प्र. शासन
  • ग्रामीण विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। गाँवों में लोगों को आवश्यकता की चीजें उपलब्ध हों साथ ही उनके पास रोजगार हो इसके लिए अनेक योजनाएँ गाँवों में क्रियान्वित हो रही है। इन योजनाओं का लाभ लोगों तक पहचे यह सुनिश्चित करना आज की सबसे बडी आवश्यकता है। ऐसा करना सिर्फ सरकार के द्वारा संभव नहीं है। सरकार के साथ स्वयंसेवी संगठन और जनता की सक्रिय भागीदारी हो यह भी जरूरी है,तभी गाँवों के संपूर्ण विकास का हमारी सरकार का सपना पूरा हो सकेगा। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् की स्थापना का उद्देश्य यही है कि ग्रामीण विकास के क्षेत्र में स्वयंसेवी संस्थाएँ और लोगों की भागीदारी हो । यह कार्य बेहतरऔर प्रभावी हो,इस कार्य में परिषद् महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी ।
    मुझे आशा है कि मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् की सक्रियता से हम गाँवों के विकास का हमारा जो लक्ष्य है उसे पूरा कर सकेगें|

    श्री शिवराज सिंह चौहान
    मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन
    अध्यक्ष म.प्र.जन अभियान परिषद्

  • माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के विकास के लिये संकल्पित हैं। उनका संकल्प है प्रदेश को स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाना। जिसके लिए मुख्यमंत्री जी के साथ हम सब भी प्रयासरत हैं। यह प्रयास अब धरातल पर भी दिखने लगे हैं। स्वर्णिम मध्यप्रदेश का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हम शहरों के साथसाथ गाँवों का भी सर्वांगीण विकास करें। आज हमारे पिछड़ेपन के मूल में ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं और रोजगार के वैकल्पिक अवसर न होना है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपना पूरा ध्यान गाँवों पर केन्द्रित करें। यह अकेले सरकार करे यह संभव नही है। इसलिए यह जरूरी है कि स्वयंसेवी संगठन और गाँवों के लोग भी सरकार के साथ मिलकर काम करें। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्‌ का गठन इसी उद्देश्य से हुआ है। म.प्र. जन अभियान परिषद ने प्रदेश के गाँवों में जन भागीदारी का एक ऐसा वातावरण निर्मित किया है जो गाँवों के विकास का एक नया इतिहास बनाएगा।

    श्री जयंत मलैया
    मंत्री ,वित्त एवं वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी,म.प्र. शासन
    उपाध्यक्ष, म.प्र.जन अभियान परिषद्

  • जन संगठन समाज के अंग है|वे समाज के वास्तविक प्रतिनिधि हैं|वे जन से,जमीन से जुड़े होते हैं|स्थानीय सोच,समझ,मानसिकता से अवगत होते हैं|अतः स्वैच्छिक संगठनों की सहभागिता विकास योजनाओं को परिणाममूलक बना सकती है|समाज की समरसता की दृष्टि से माननीय मुख्यमंत्री जी समाज की अंतिम पंक्ति तक समाज निर्माण करनाचाहते हैं|प्रदेश निर्माण की इस संकल्पना में जन संगठनों की प्रभावी भूमिका हो सकती है|


    श्री प्रदीप पाण्डेय
    उपाध्यक्ष,म.प्र. जन अभियान परिषद्

  • राज्य की समस्त पंजीबद्ध संस्थाओं का पंजीयन कर उनका परीक्षण व मूल्यांकन किया जायेगा। ''इन संस्थाओं की ताकत, कमजोरियों व अवसरों का मूल्यांकन'' उनके कार्यालय, मैदानी कार्य व वार्षिक रिपोर्ट साथ ही अन्य प्रकाशित दस्तावेजों के आधार पर किया जायेगा। ''इसके आधार पर संस्थाओं का प्रत्याययन (Accreditation) किया जाएगा। यह प्रत्याययन शासन के विभिन्न शासकीय विभागों को उनके कार्यक्रमों एवं योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं क्रियान्वयन में भागीदारी हेतु प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाएँ उपलब्ध कराने का आधार बनेगा।''


समाज के समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु शासन सदैव तत्पर रहा है। संगठनात्मक सीमाओं के भीतर यह सराहनीय प्रयास भी अपने अंतिम उद्देश्य की प्राप्ति में अपर्याप्त रहे है । इस दिशा में अपने व्यवस्थागत ढॉचे का अतिक्रमण कर शासन ने स्वैच्छिक संगठनों के अस्तित्व को मान्यता दी है। जनता और सरकार के बीच सेतु के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों को विकास की सशक्त इकाई के रूप में विकसित करने के उद्देश्य हेतु ’’मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्‘‘ का गठन किया गया है। यह परिषद् शासन को सलाह देने,सामुदायिक भागीदारी प्रोत्साहित करने,स्वयंसेवी संस्थाओं से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी समेकित कर,नीतियों के क्रियान्वयन के लिये एक समन्वयक अभिकरण के रूप में कार्य करेगी। म. प्र. जन अभियान परिषद्,मध्यप्रदेश सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम,1973 के अंतर्गत दिनांक 04.07.1997 को पंजीकृत की गयी है। संस्था का पंजीयन क्रमांक 4964/97है।

श्री उमेश शर्मा,
कार्यपालक निदेशक

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