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कार्यक्षेत्र

म.प्र. देश का हृदय प्रान्त है। हृदय का कार्य सम्पूर्ण शरीर में परिलक्षित होता है। सम्भवतः इसीलिए प्रकृति ने सृजन के लिए आरम्भिक आवश्यकताओं के सभी संसाधनों से मध्यप्रदेश को समृद्ध किया है। फिर भी यह दुर्योग रहा कि ना तो मध्यप्रदेश अपने संसाधन का समुचित उपयोग अपने विकास में कर पाया और ना सम्पूर्ण राष्ट्र के सामने हृदयरूपी आदर्श का उदाहरण प्रस्तुत कर पाया। विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र, विशाल जनसंख्या और प्राकृतिक-सामाजिक विविधता, म.प्र. में समग्र विकास के लिए सतत् चुनौती रही है। इसीलिए जन अभियान परिषद् ने अपने कार्यक्षेत्र की सीमाएँ, मध्यप्रदेश की भौगोलिक सीमा को ही माना है। इस प्रदेश के नगरों, गाँवों, वन-प्रांतों और पर्वत-कंदराओं में बसे वनवासी, गिरिवासी, ग्रामवासी और नगरवासी जन अभियान परिषद् के कार्यक्षेत्र के प्रमुख अंग है, अवयव हैं और उपकरण भी, जो विकास की अवधारणा को आकार देने में सहभागी होंगे।

मध्यप्रदेश की विशाल जनशक्ति और उसके भीतर समाए कौशल, ज्ञान, तकनीक, शिल्प और सांस्कृतिक विशेषताएँ भी परिषद् का कार्यक्षेत्र है। परिषद् का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचना है। परिषद् प्रत्येक संस्था और संगठन, को साथ लेकर अपने कार्यक्षेत्र का ताना-बाना बुनना चाहती है।


इस हेतु परिषद्, सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर उनके कार्यक्षेत्र की पहचान कर, उन्हें शासन से सहयोग व सुविधा दिलवाने में मदद करेगी। स्वयंसेवी संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों को विकास की सशक्त ईकाई के रूप में विकसित कर उनकी क्षमता एवं वृत्ति के आधार पर वर्गीकृत करेगी। एक संस्था को दूसरी संस्था से जोडेगी ताकि विकसित स्वयंसेवी संगठनों का एक ऐसा संसार निर्मित हो, जो मैदानी स्तर पर विकास का आधार बने।


 
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