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कार्य विस्तार

किसी भी समाज, प्रांत और राष्ट्र का विकास तब तक संभव ही नहीं है जब तक उससे जुडे हुए अथवा उसमें निवास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति विकास की अवधारणा में सम्मलित नही हो। म.प्र. के विकसित स्वरूप के लिए आवश्यक है कि प्रदेश का हर वासी अपने स्वभाव, क्षमता और दक्षता के अनुरूप, अग्रिम पंक्ति में खडे होने के प्रयास में सम्मिलित हो। म.प्र. जन अभियान परिषद् ने इसी काम का बीडा उठाया है। उसे अपने कार्य का विस्तार समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम छोर पर खडे व्यक्ति तक करना है, उस तक पहुँचना है। उसे विकास का साथी बनाना है। जब तक वह व्यक्ति जन विकास की अवधारणा के रूप में सक्रिय नहीं होगा, तब तक म.प्र. के विकास की कल्पना नही की जा सकती।

परिषद् को विकास के लिए आवश्यक तत्वों और तथ्यों तक पहुँचना है। हर उस गाँव तक और उस बस्ती तक परिषद् को अपना कार्य विस्तार करना है, जो अब तक अशिक्षा और पिछडेपन के अंधेरे में अपनी जिन्दगियाँ जीने को मजबूर हैं. उन तमाम जन समूहों और जन क्षमताओं को अपना भागीदार बनाना है, जिनमें ऊर्जा और क्षमता की असीम संभावनाएँ छिपी हुई हैं। इसके लिए इन असीमित संभावनाओ और क्षमता वाले स्थानीय जनों को जोडकर स्वयंसेवी संगठन बनाए जायेंगे। म.प्र. में भाषा, जीवन शैली और व्यवहार की विविधता के बावजूद उन्हे शिक्षित और प्रशिक्षित कर विकास की मूलधारा से जोडा जाएगा।

यह स्वयंसेवी समूह अपने क्षेत्र के संसाधनों, आवश्यकताओं, विशेषताओं, वर्जनाओं और सृजनाओं के तत्वों का अध्ययन करेंगे। उनका कार्य व्यवहार में उपयोग कर गाँव और क्षेत्र को आदर्श क्षेत्र बनाने में सहभागी होंगे। परिषद् अपने कार्य का विस्तार स्थानीय लोगों से निरन्तर संपर्क सहयोग के साथ संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और समूह-समागमों द्वारा करेगी। व्यवस्था और समाज के बीच समन्वयक की भूमिका निभाना ही जन अभियान परिषद् के कार्य विस्तार का आधार है।

 


 
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