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सहभागिता

 

जन अभियान परिषद् ने सृजनात्मक और सकारात्मक सोच से सहभागिता द्वारा एक संतुलित संसार के निर्माण की अभिकल्पना की है। ऋग्वेद का 'संगच्छध्वम् संवदध्वम्' मंत्र सदियों से हमें साथ चलने, साथ बोलने की प्रेरणा देता है। यही भाव लोकतंत्र का है और जन अभियान परिषद् का भी। परिषद् द्वारा सहभागिता का लक्ष्य आंमत्रित है, सहभागिता में कार्य एवं भाग दोनों शामिल है जिसमें सेवा की भावना है, जो समाज के लिए मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक, आर्थिक, किसी भी रूप में कुछ करने की इच्छा रखता हों, आंमत्रित है। आप अपने भाव से, विचार से, श्रम से, साधन से, संवाद से, कार्य से जुड सकते हैं। साथ चलने, साथ बैठने के इस यज्ञ में देने के भाव में परस्पर पूरकता है। यहाँ सभी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से आगे बढेंगे, सकारात्मक समालोचना द्वारा कमियों को दूर करेंगे और उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होंगे। नये प्रयोग का समावेश और सहभागिता से सभी पक्ष लाभन्वित होंगे। हम व्यवस्था, समाज और स्वयंसेवी संगठनों के बीच समपूरकता से सहभागिता का एक ऐसा सेतु निर्मित करेंगें जिसमें सभी एक-दूसरे के सहायक हो, सहभागी हो, विकसित हो। एक मंच पर इकट्ठे होकर उत्पादकता को विस्तार दें तथा समाज की क्रियाशीलता को संगठित करके जागृति और जन-निर्माण के काम में जुटें।

विश्व के एक गाँव में सिमटती आधुनिक दुनिया की दौड में हम अपने मध्यप्रदेश को तभी आगे रख सकेंगे, जब विकास की धारा में काम करने वाले सभी व्यक्ति, व्यवस्था और संगठन परस्पर सहभागी हों। स्वयंसेवी संगठन अपनी क्रियाशीलता और सकारात्मक सोच के लिए लोकप्रिय है। संगठनों की सेवा भावना और सामर्थ्य को देखकर ही म.प्र. जन अभियान परिषद् इनके सहयोग से विकास की धारा को तेज गति से बहाने के लिए प्रयासरत है। इस प्रयास में आप सब सहभागी बनें। शायद हमारा यह प्रयास भगीरथी हो।

म.प्र. जन अभियान परिषद में गठित प्रस्फुटन समितियो की संभागवार सूची
रीवा जबलपुर
भोपाल
ग्वालियर
सागर उज्जैन इंदौर

 
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